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संस्था और क्षमता निर्माण

संस्था और क्षमता निर्माण थीम के अंतर्गत गतिविधियों का उद्देश्य सामुदायिक स्तर् पर सशक्त संस्थानों का निर्माण करना हैं। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए परियोजना में एक ढ़ांचाबद्ध अधिगम एंव क्षमता निर्माण प्रणाली (स्ट्र्क्चर्ड लर्निग एंड कैपेसिटी बिल्डिंग सिस्टम)को स्थान देने का प्रयास किया जा रहा है। इसमें मोटे तौर पर निम्नलिखित गतिविधियां शामिल होगीः-


  • क्षमता निर्माण (सीबी) के विभिन्न क्षेत्रों के लिए राज्य, जिला, प्रखंड और गांव के स्तर पर साधनसेवियों का रोस्टर तैयार करना।
  • सामुदायिक कार्यवाही मैनुअल (सीओएम) को आधार दस्तावेज मानते हुए विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए मॉडयूल तैयार करना।
  • बैंको/ वित्तियसंस्थाओं/ सार्वजनिक क्षेत्र/ नागरिक समाज/ गैर सरकारी संगठनों को लक्ष्य करके हितग्राहियों (स्टैक होल्डर्स) के लिए राज्य/ जिला पंचायत स्तर पर परियोजना के परिचय तथा उसके दृष्टिकोण से युक्त मुख्य कार्यशालाएं आयोजित करना।
  • मुख्य मॉड्यूलों एंव सामग्रियों का विकास करना जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं
    • क) निम्नलिखित के बारे में स्वंय सहायता समूहों और महासंघों का प्रशिक्षणः
      • 1. स्वंय सहायता समूहों (एसएचजी), ग्राम संगठनों (वीओ) तथा प्रखंड स्तरीय महासंघों (बीएलएफ) की संकल्पनाएं
      • 2 सामूहिक प्रक्रियाएं तथा प्रबंधन
      • 3 धन प्रबंधन एंव बहीखाता लेखन सहित सूक्ष्मक्ति विषयक कार्यवाहियां
      • 4 ऋण प्रथामिकताकरण योजना (क्रेडिट प्रायरीटाइजेशन प्लान)
      • 5 आपसी विरोघ का निराकरण और
      • 6 समाजिक मुद्दे।
    • ख) स्वंय सहायता समूहों, ग्राम संगठनों तथा प्रखंड स्तरीय महासंघों एंव नेताओं तथा पर पेशावरों के लिए अतिरिक्त प्रशिक्षण।
    • ग) परियोजनाकर्मियो के लिए अधिष्ठापन (इंडक्शन) मॉडयूल।
    • घ) प्रखंड परियोजना क्रियान्वयन इकाई और राज्य परियोजना प्रबंधन इकाई (एमपीएमयू) के कर्मियों के लिए विशिष्ठ पशिक्षण मॉड्यूल।

    घटक- 1 के अंतर्गत आने वाली जिन अन्य मुख्य गतिविधियों को सहायता दी जाय्गी, उनमें निम्नलिखित शामिल होंगे।



    पंचायती राज्य संस्थाएं

    इस गतिविधि का उद्देश्य प्रभावी ढ़ंग से गरीबों को लक्षित करने तथा उनके लिए अधिक समावेशी बनाने के लिहाज से बिहार सरकार द्वारा प्रायोजित जन वितरण प्रणाली (पीडीएस), पेंशन, समेकित बाल विकास योजनाओं (आइसीडीएस), और राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार नियोजित गारंटी अधिनियम (नरेगा) जैसे समाजिक सुरक्षा के क्रियान्वयन हेतु पंचायती राज संस्थाओं का- खास कर ग्राम पंचायत के स्तर पर सवेंदनीकरण करना हैं।


    अक्टूबर 2006 में संपन्न पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव के बाद जिसमें ग्राम पंचायतों में लगभग 60 प्रतिशत पदों पर महिलाओं ने जीत हासिल की, जिनमें से अनेक लक्षित समुदायों की थी, परियोजना के लिए पंचायती राज संस्थाओं के साथ काम करने का अनोखा अवसर पैदा हुआ। परियोजना में जिन गतिविधियों को हाथ में लिया गया हैं, उनमें सकारात्मक प्रत्युत्तर में सक्षम बनाने के लिए पंचायती राज संस्थाओं का संवेदनेकरण और उनका क्षमता निर्माण शामिल हैं। और वह बिहार सरकार के सामाजिक सुरक्षा कार्यकमों तक गरीबों की पहुंच बढ़ाने के लिहाज से अनिवार्य हैं। परियोजनाओं के तहत समूदाय आधारित संगठनो (सीबीओ) में निर्धनों तथा अति निर्धनो का भी क्षमता निर्माण किय जाएगा ताकि वे विभिन्न सामाजिक सुरक्षा कार्यकमों और योग्यता के मापदंडो को समझ सकें और उन तक पहुंच बना सकें। इन गतिविधियों में शामिल हैं -


  • पंचायती राज संस्थाओं के 'निर्वाचित' सदस्यों का संवेदनीकरण/ प्रशिक्षण - जिन राज्यों में पंचायती राज संस्थाएं बेहतर परिणाम वाली क्षमता निर्माण कार्यवाहियों के साथ घनिष्ठतापूर्वक काम कर रहे हैं, वहां के क्षेत्र भ्रमण समेत एक विशेषिकृत प्रशिक्षण कार्यक्रम विकसित करना।
  • संवाद - स्वंय सहायता समूह के सदस्यों और पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित पदाधिकारियों के साथ नागरिक अधिकारों एंव कर्त्तव्यो पर संवाद स्थापित करना।

  • रणनीतिक संचार:

    राजनैतिक संवाद का मुख्य उद्देश्य सामुदायिक संस्था निर्माण प्रकैया के सुदृढ़ीकरण और उनके टिकाऊपन के लिए जागरूकता पैदा करना हैं। इसमें क्षेत्रीय स्तर पर क्रियान्वित किए जाने वाली परियोजना के सभी अवयवों के लिए सूचना, शिक्षा, एंव संवाद (आइईसी) संबंधी सहायता शामिल होगी। जागरूकता कार्यक्रमो और अभियानों में फोकस ग्रामीण गरीबों के हितों को प्रभावित करने वाली समाजिक और/ या आर्थिक गतिविधियों से संबंधित मुद्दों पर होगा- जैसे संस्था निर्माण, जीविका में बढ़ोत्तरी, बाल शिक्षा, बाल श्रम, बाल विवाह, एचाआइवी/ एड्स आदि। इस खंड के अंतर्गत निम्नलिखित गतिविधियां आएंगी।


  • जीविका के विकल्पों एंव दृष्टिकोंणों से संबंधित जागरूकता निर्माण - पारदर्शी, सहभागी और जवाबदेह संस्था निर्माण प्रक्रिया आरंभ की गई सामुदायिक संसथाओं के टिकऊपन की कुंजी है। संवाद की रणनीति बुनियाद निर्माण से संबंधित जरूरतों की पूर्ति की होगी। समुदाय आधारित संगठनों में चर्चा हेतु सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण के मुद्दों से परिचित कराने के लिए सामुदायिक समन्वयकों (सीसी) और सामुदयिक साधनसेवियों को प्रतिशत किया जाएगा। परियोजना के तहत इन सामाजिक और आर्थिक हस्तक्षेपों पर आधारित समुदाय आधारित संगठनों को अनुभवों और सीखों पर पकड़ बनाने तथा उन्हें प्रदर्शीत करने का भी सार्मथ्य प्रदान किया जाएगा।
  • प्रशिक्षण सीसीएस और सी0आर0पी0'ज सी0बी0ओ0'ज पर चर्चा के लिए सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण के मुद्दों को लागू करने के लिए. परियोजना भी मदद मिल सकती है पर कब्जा करने और अनुभवों के प्रसार और इन सामाजिक और आर्थिक उपायों पर आधारित सी0बी0ओ0'ज में सीखने.

  • परियोजना में प्राथमिक स्वंय सहायता समूहों के लिए अधियम अनूसूची (लर्निग शिड्यूल)

  • आशा की जाती है कि प्रत्येक स्वंय सहायता समूह सदस्यों को समूह प्रबंधंन के पहलुओं के बारे में जागरूकता बनाया जाएगा। अतएव स्वंय सहायता समूहों के लिए अधिकगम विषयवस्तओं की अच्छी तरह ढ़ांचाबद्ध अनुसूची में निम्नलिखित आयामों का समावेश होगा।

  • क्रम स.

    सुझाया गया मॉड्यूल

    पहला दिन

    दूसरा दिन

    तीसरा दिन

    चौथा दिन

    पांचवा दिन

    छ्ठा दिन

    सातवां दिन

    1

    स्वंय सहायता समूह की जरूरत क्यों

     

     

     

     

     

     

     

    2

    स्वंय सहायता समूहों का जीवन चक्र

     

     

     

     

     

     

     

    3

    स्वंय सहायता समूहों की समूह बैठक

     

     

     

     

     

     

     

    4

    नेतृत्व

     

     

     

     

     

     

     

    5

    विवादों का निपटरा

     

     

     

     

     

     

     

    6

    .हमारे समूह हमारे मायक

     

     

     

     

     

     

     

    7

    स्वं मूल्याकंन

     

     

     

     

     

     

     

    8

    .बाहरी कारकों से निपटारा

     

     

     

     

     

     

     

    9

    लैगिक मुद्दे

     

     

     

     

     

     

     

    10

    योजना निर्माण कौशल

     

     

     

     

     

     

     

    11

    गरीबी का विश्लेषण

     

     

     

     

     

     

     

    12

    समूह को बैंक से कैसे जोड़ा जाय

     

     

     

     

     

     

     

    13

    समूगत बचत विधियां

     

     

     

     

     

     

     

    14

    समूहगत ऋण प्रदान के मानक

     

     

     

     

     

     

     

    15

    स्वंय सहायता समूह और महासंघ की भूमिका

     

     

     

     

     

     

     

    16

    स्वंय सहायता समूहों का टिकाऊपन

     

     

     

     

     

     

     

    17

    जोखिम प्रबंधंन

     

     

     

     

     

     

     

    18

    सामूदायिक निवेश कोष संबंधी मॉड्यूल

     

     

     

     

     

     

     

    19

    वित्तिय संस्थानो से समूहों को परिचित कराना

     

     

     

     

     

     

     

    20

    सदस्यों और मुनीमों के लिए बहीखाता प(ति

     

     

     

     

     

     

     




    समुदाय संस्थानों के लिए सीखने का विषय

    बाद में सामुदायिक संस्थानों कि लिए व्यापक अधियम विषयवस्तुओं के मामले में नीचे रेखाकिंत थीमों का अनुसरण किय जाएगा


      स्तर

    थीम

    अवयव

    लक्षित समूह

    ग्राम स्तर

    समूह प्रबंधन

    नियमित बैठकों का महत्व
    नेतृत्व संबंधी मुद्दा विवादों
    का निपटारा समूह में एकजुटता और इसका
    महत्व मानकों के निर्माण की जरूरत और महत्व

    स्वंय सहायता समूह सदस्य

    वित्तिय प्रबंधंन

    समूहगत बचतों का महत्व समूहगत ऋण प्रदान का मानक निर्माण बहीखाता लेखन का महत्व विभिन्न स्वरुपों में उपलबध कोषों का परिचय सामुदायिक निवेश कोष बैंक और अन्य वित्तिय संस्थाओं से जुड़ना नियमित एंव यथासमय भुगतान शिड्यूल का महत्व कोष का चक्रानुसरण (रोटेशन) उपलब्ध

    स्वंय सहायता समूह सदस्य

    सूक्ष्म ऋण योजना

    सूक्ष्म ऋण योजना क्यों, सूक्ष्म ऋण योजना का महत्व, स्वंय सहायता समूह का प्रोफाइल, स्वंय सहायता समूह सदस्य की आय और व्यय सूक्ष्म ऋण योजना, सूक्ष्म ऋण योजना के प्रथम चरण के ऋणधारी सदस्य (प्राथमिताकरण योजना), सूक्ष्म ऋण योजना के द्वितीय चरण की चक्रानुसरण विधि

    स्वंय सहायता समूह सदस्य

    ग्राम संगठन

    ग्राम संगठ्न निर्माण की आवयश्कता
    ग्राम संगठन के उद्देश्य
    ग्राम संगठन की प्रक्रिय
    ग्राम संगठन की भूमिका और उत्तरदायित्व
    ग्राम संगठन और उससे आगे

    स्वंय सहायता समूह सदस्य

    प्रखंड स्तर

    बहीखाता लेखन

    बहीखाता लेखन और मुनीम की भूमिका बहीखाता लेखन और मुनीम की भूमिका की जरूरत तथा महत्व

    एसएचजी के मुनेम/ समुदाय संगठक, एसएचजी नेता

    सूक्ष्म ऋण योजना

    सूक्ष्म ऋण योजना का महत्व
    स्वंय समूह का प्रोफाइल
    स्वंय सहायता समूह का सदस्यवार प्रोफाइल
    स्वंय सहायता समूह सदस्य की आय और व्यय सूक्ष्म ऋण योजना
    सूक्ष्म ऋण योजना का प्रथम चरण (प्राथमिकताकरण योजना)
    सूक्ष्म ऋण योजना के द्वितीय चरण की चक्रानुसरण विधि

    स्वंय सहायता समूह सदस्य तीन सदस्य प्रति स्वंय सहायता समूह

    ग्राम संगठन

    ग्राम संगठन निर्माण की आवश्यकता
    ग्राम संगठन के उद्देश्य
    प्रबंधंन के मानक
    ग्राम संगठन की बैठक प्रक्रिया इसकी भूमिका और जवाबदेहियां तथा गतिविधियां

    ग्राम संगठन की कार्यकारी समिति के सदस्य

    Block level

    स्वंय सहायता समूह क्यों

    स्वंय सहायता समूह का जीवन च्रक
    पंचसूत्र का परिचय समूह निर्माण के मानक
    नियमित बैठकों का महत्व
    नेतृत्व का मुद्दा
    विवादों का निपटारा
    समूह में मेलजोल और इसका महत्व

    संगठक

    बहीखाता लेखन

    बहीखाता लेखन और मुनीम की भूमिक बहीखाता लेखन और मुनीम की भूमिका की जरूरत तथा महत्व

    समुदाय संगठक

    ग्राम संगठन की संकल्पना और प्रबंधंन

    ग्राम संगठन निर्माण की आवश्यकता
    ग्राम संगठन के उद्देश्य
    प्रबंधंन के मानक
    ग्राम संगठन की बैठक प्रक्रिया
    इसकी भूमिका और जवाबदेहियां तथा
    ग्राम संगठन की गतिविधियां

    समुदाय संगठक

    सूक्ष्म ऋण योजना एंव मूल्यांकन प्रणाली

    सूक्ष्म ऋण योजना का महत्व
    क्या सूक्ष्म ऋण योजना की कोई जरूरत है
    सूक्ष्म ऋण योजना के विभिन्न स्वरूप सामान्य एंव खाद्द सुरक्षा
    स्वंय सहायता समूह का सदस्यवार प्रोफाइल
    स्वंय सहायता समूह सदस्य की आय और व्यय
    सूक्ष्म ऋण योजना
    सुक्ष्म ऋण योजना के प्रथम चरण के ऋणधारी सदस्य (प्राथमिकताकरण योजना)
    सूक्ष्म ऋण योजना के द्वितीय चरण की चक्रानुसार विधि
    मूल्यंकन का महत्व
    सूक्ष्म ऋण योजना के मूल्यांकन के मापदंड

    ग्राम संगठक के पदधारी




    सामुदायिक संस्थाओं के क्षमता निर्माण के लिए क्रियान्वयन व्यवस्था

    सामुदायिक संस्थाओं के संपूर्ण क्षमता निर्माण एंव संस्था निर्माण इकाई द्वारा किया जाएगा। एक पूर्णकालिक राज्य परियोजना प्रबंधक और एक परियोजना प्रबंधक की प्रतिनियुक्ति की जाएगी और उन्हें सामुदायिक संस्थाओं के लिए क्षमता निर्माण की घटनाओं ( इवेट्स) के योजना निर्माण, क्रियान्वयन तथा समन्वय की जवाबदेही दी जाएगी। इस मकसद के लिए प्रखंड इकाई के पास भी एक विशेष.. प्रशिक्षण अधिकारी होगा क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के सारे आवयश्क इंतजामों के लिए जवाबदेह होगा। एक क्षमता निर्माण एंव प्रशिक्षण कोषांग (सेल) भी प्रस्तावित हैं। यह कोषांग बहुकार्यी ( मल्टी फंक्शनल) तरीके से बड़े पैमाने पर मौजूद कर्मियों तथा समुदायिक स्तर की प्रशिक्षण संबंधी जरूरतों की देखरेख करेगा। बाद के चरण मे इस कोषांग को ग्रामीण विकास के पेशावरों (प्रोफेशनल्स) के लिए राज्य की प्रशिक्षण संबंधी जररतों की देखरेख हेतु स्वंतत्र संगठन के रूप में विकसित किया जा सकता है प्रखंड स्तर पर उपयुक्त प्रशिक्षण अधिसंचना का आभाव एक बड़ी चुनौती होगी। इससे निपटने के लिए परियोजना मे दो दिशाओं वाली रणनीति अपनायी जाएगी जिनमें जहां भी आवश्यक हो, प्रखंड स्तर पर प्रशिक्षण अधिसंरचना का निर्माण करना, तथा अभी मौजूद उपयुक्त सरकारी अधिसंरचना को हासिकल करना हैं। सामुदायिक संस्थाओं के लिए बड़े पैमाने की क्षमता निर्माण योजना संचालित करने के लिहाज से बाहरी परामर्शी अभिकरण (कन्सल्टेंट एजेंसी) को शामिल करना एक मुख्य रणनीति होगी। जिन अन्य बिन्दुओं पर काम किया जाना है, वे निम्नलिखित हैं:


  • राज्य इकाई में क्षमता निर्माण एंव संस्था निर्माण विशेष.. सामुदायिक संस्थाओं को प्रशिक्षित करने के लिहाज से प्रमुख नोडल व्यक्ति होगा। सारे रणनीतिक निर्णय उसी के स्तर से किए जाएगें।
  • * राज्य और प्रखंड, दोनों स्तरों पर कामकज विशेष.. (फक्शनल स्पेशलिस्ट) और संसाधन संगठन (रिसोर्स ऑगेनाइजेशन) एक मिलकर क्षेत्रांतर्गत मूल्य निरूपण (फील्ड असेसमेंट)पर आधारित क्षमता निर्माण समाधान विकसित करेंगें।
  • प्रशिक्षण संबंधी अवयश्कताओं का मूल्य निरूपण सर्वाधिक (कहें त्रैमासिक) अधार पर किया जाएगा।
  • तकनीकी प्रशिक्षण इस विषय की निफणता वाले बाहरी प्रशिक्षक पैनल अथवा संस्थानों को दी जाएगी।
  • पीआइपी में सीखों और उसके निहितार्थों को शामिल करने के लिए वार्षिक आवयश्कता मूल्य निरूपण (ऐनुअल नीड असेसमेंट) भी कराया जाएगा।
  • एक क्षमता निर्माण एंव प्रशिक्षण कोषांग मॉड्यूल और क्षमता निर्माण की रणनीति तैयार करेगा। यह कोषांग सामुदायिक संस्थाओं तक क्षमता निर्माण कार्यक्रम का विस्तार करने में प्रखंड इकाई को सहयोग करेगा।

  • क्षमता निर्माण हेतु प्रविधि

    परियोजना में क्षमता निर्माण के लिए निम्नलिखित प्रविधि का उपयोग किया जाएगा।


  • मॉड्यूलों का विकास - क्षमता निर्माण की समस्त गतिविधियों का आयोजन समुदाय के सदस्यों की ग्रहण क्षमता के अनुरूप प्रभावी मॉड्यूल के साथ किया जाएगा। इसका निर्माण स्थानीय भाषा में किया जाएगा और उसमें श्रव्य- दृश्य उपकरणों का प्रचुर प्रयोग करने की गुजाइश होगी।
  • * करने के जरिए सीखना- प्रत्येक मॉड्यूल में पिछली बार का आयोजित कार्यक्रमों तथा समुदाय से मिलने वाले फीडबैंक से सीखने के जरिए सुधार किया जाएगा।
  • देखने के जरिए सीखना- सर्वोत्तम व्यवहारों को देखने के लिए समुदाय के सदस्यों को भेजने के लिहाज से देश और राज्य के विभिन्न स्थलों की पहचान की जाएगी और वहां उन्हें भेजने की व्यवस्था के जाएगी।
  • साधनसेवियों और अभिकरणों को सूचीबद्ध करना- परियोजना में बाहरी संसाधन अभिकरणों तथा साधनसेवियों की पहचान की जाएगी और प्रखंडो तथा राज्य के स्तर पर क्षमता निर्माण घटक के सेवा प्रदान के लिए उनकी सूची बनाई जाएगी। जिन संसाधन अभिकरणों या साधनसेवियों की सेवा ली जाएगी उनके साथ स्पष्ट समझौता पत्र (एमओयू) तैयार किया जाएगा।
  • करबद्ध समर्थन(हैंडहोल्डिंग सपोर्ट)- परियोजना में यह क्षमता निर्माण की प्रमुख रणनीति होगी। परियोजना क्रमियों तथा अन्य साधनसेवियों/ दलों/ अभिकरणों को समुदायिक स्तर पर कार्यक्रमों की प्रभाविता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण कोषांग द्वारा नियमित करबद्ध समर्थन के जरिए सतत परामर्श (काउसलिंग) दिया जाएगा।


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